The Mystery of Alexander the Great's Death: Was Alexander Really Buried Alive?

इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जिन्हें याद करते ही मन में कई सवाल उठते हैं। ऐसा ही एक नाम है–अलेक्जेंडर द ग्रेट। हमारे इस उपमहाद्वीप में जिन्हें सिकंदर के नाम से जाना जाता है।

सिर्फ 20 साल की उम्र में वे मैसेडोनिया यानी आज के उत्तरी ग्रीस के राजा बने। अगले 12 सालों में उन्होंने उस दौर की जानी-मानी दुनिया का बड़ा हिस्सा जीत लिया। ग्रीस से लेकर मिस्र, फारस और भारत की सीमाओं तक उनका विशाल साम्राज्य फैल गया।

इतिहासकारों के मुताबिक अलेक्जेंडर इतिहास के सबसे बेहतरीन मिलिट्री रणनीतिकार थे। वे युद्ध के मैदान में कभी नहीं हारे। पर अफ़सोस की बात देखिए! जिन्हें बड़ी सेनाएं भी नहीं हरा सकीं, वे सिर्फ 32 साल की उम्र में रहस्यमयी कारणों से मारे गए । उस वक्त वे अपनी कामयाबी के शिखर पर थे।

हजारों साल बीत चुके हैं। आज तक इस महान सम्राट की कब्र या कंकाल का कोई सुराग नहीं मिला। लेकिन प्राचीन रिकॉर्ड्स में उनकी बीमारी के आखिरी 12 दिनों के लक्षण दर्ज हैं। उन्हीं जानकारियों के आधार पर नीचे यह विश्लेषण किया गया है।

बेबीलोन के वे मनहूस 12 दिन

323 ईसा पूर्व का मई महीना था। अलेक्जेंडर उस समय प्राचीन बेबीलोन यानि आज का इराक में थे। वे वहां अरब प्रायद्वीप को जीतने की नई प्लानिंग बना रहे थे।

इसी दौरान एकदिन वे अपने दोस्त मीडियास की डिनर पार्टी में गए। अलेक्जेंडर के सचिव यूमेनीस ने उस दौर की रॉयल डायरीज़ लिखी थी। मशहूर इतिहासकार अरियन की किताब Anabasis of Alexander में भी इसका जिक्र मिलता है। इन रिकॉर्ड्स के मुताबिक, उस रात काफी शराब पीने के बाद अलेक्जेंडर की पीठ में तेज दर्द हुआ। साथ ही उन्हें तेज बुखार आ गया।

अगले दिन से उनकी हालत बिगड़ने लगी। इतिहास में दर्ज उनके आखिरी 12 दिनों की जानकारी काफी दर्दनाक है ।

शुरुआती कुछ दिनो में अलेक्जेंडर के शरीर का तापमान बहुत बढ़ गया। उनकी चलने-फिरने की ताकत खत्म हो गई। आठवें दिन उनका शरीर पैरों से ऊपर की तरफ सुन्न  होने लगा। दसवां दिन उनकी आवाज पूरी तरह चली गई। ग्यारहवां और बारहवां दिन वे सिर्फ अपनी आंखें हिला पाते थे। हालांकि उनका दिमाग पूरी तरह सचेत था।

इतिहासकार अरियन और प्लूटार्क के मुताबिक अलेक्जेंडर आखिरी वक्त तक होश में थे। जब परेशान सैनिक उन्हें देखने राजमहल आए, तब अलेक्जेंडर बोल नहीं पा रहे थे। फिर भी उन्होंने आंखों के इशारे और सिर हिलाकर सैनिकों का स्वागत किया। आखिरकार 323 ईसा पूर्व के 10 या 11 जून को सम्राट को आधिकारिक तौर पर मृत घोषित कर दिया गया ।

पहला बड़ा रहस्य: 6 दिनों तक शरीर का न सड़ना और उन्हें भगवान मानने का विश्वास

अलेक्जेंडर की मौत के बाद राजमहल में भारी राजनीतिक उथल-पुथल फौरन शुरू हो गई। नया सम्राट कौन बनेगा, इसे लेकर जनरलों में जंग छिड़ गई। इस वजह से अलेक्जेंडर के अंतिम संस्कार की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया।

जून की भीषण गर्मी में बेबीलोन का तापमान बहुत ज्यादा था। साइंस के आम नियमों के हिसाब से ऐसे मौसम में 24-48 घंटों में शव सड़ने लगता है। उससे तेज बदबू आने लगती है। लेकिन अलेक्जेंडर का शरीर छह दिनों तक गर्मी में पड़ा रहा। इसके बावजूद न तो शरीर सड़ा और न ही कोई बदबू आई।

प्राचीन ग्रीक लोगों के लिए यह घटना एक चमत्कार जैसा था। वे मानने लगे कि अलेक्जेंडर कोई आम इंसान नहीं थे। वे ग्रीक देवता ज़ीउस के बेटे थे। लोगों को लगा कि भगवान का बेटा होने के कारण ही उनका शरीर नहीं सड़ा। लेकिन मॉडर्न साइंस और मेडिकल रिसर्च ने इसके पीछे एक दूसरा ही सच खोज निकाला है।

मॉडर्न साइंस और गिलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS): जिंदा इंसान को ही घोषित कर दिया गया मृत?

हालांकि सम्राट का कंकाल या ममी मिली नहीं है। इसलिए डॉक्टरों ने शरीर की कोई सीधी जांच नहीं की। इसके बजाय उन्होंने रेट्रोस्पेक्टिव डायग्नोसिस तकनीक अपनाई। इसमें प्राचीन रिकॉर्ड्स में दर्ज लक्षणों को मॉडर्न मेडिकल साइंस के साथ मिलाकर देखा जाता है।

न्यूजीलैंड की ओटागो यूनिवर्सिटी की रिसर्चर डॉ. कैथरीन हॉल ने इसी तकनीक का इस्तेमाल किया। उन्होंने अलेक्जेंडर की मौत पर एक रिसर्च सामने रखी। साल 2018 में इंटरनेशनल जर्नल Ancient History Bulletin में उनका यह रिसर्च पेपर पब्लिश हुआ था।

डॉ. कैथरीन के मुताबिक अलेक्जेंडर किसी चमत्कार से सुरक्षित नहीं रहे थे। असल में जब उन्हें मृत घोषित किया गया, तब वे मरे ही नहीं थे! उनकी रिसर्च में न्यूरोलॉजी की एक दुर्लभ बीमारी की बात सामने आई। इसका नाम है–गिलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS)।

बीमारी का प्रकार: यह एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है। इसमें शरीर का इम्युनिटी सिस्टम गलती से अपनी ही नसों पर हमला कर देता है।

इन्फेक्शन का कारण: अलेक्जेंडर शायद कंप्यूलॉबैक्टर पाइलोरी नाम के बैक्टीरिया की चपेट में आ गए थे। उसी इन्फेक्शन से उन्हें GBS हुआ।

लक्षण: इसमें मरीज का शरीर नीचे से शुरू होकर ऊपर की तरफ पैरालाइज होने लगता है। मेडिकल साइंस में इसे Ascending Paralysis कहते हैं।

मेडिकल साइंस की चौंकाने वाली थ्योरी

प्राचीन काल में मौत तय करने के लिए मॉडर्न टेक्नोलॉजी जैसे ईसीजी, ब्रेन स्कैन या नस चेक करना इत्यादि नहीं थी। उस समय डॉक्टर सिर्फ नाक के पास हाथ रखकर या सांसें देखकर मौत का अंदाज़ा लगाते थे।

GBS बीमारी की वजह से अलेक्जेंडर का शरीर बहुत ज्यादा पैरालाइज हो गया था। उनके शरीर की ऑक्सीजन की जरूरत बेहद कम हो गई थी। उनकी सांसें इतनी धीमी हो गईं कि डॉक्टरों को लगा वे मर चुके हैं। इसलिए उन्हें गलती से मृत मान लिया गया! इसका मतलब है कि छह दिनों तक जो शरीर नहीं सड़ा, वह कोई लाश नहीं थी। अलेक्जेंडर उस वक्त कोमा और पैरालिसिस में जिंदा थे। शरीर सुन्न होने से वे हिल-डुल नहीं पा रहे थे, लेकिन उनका दिमाग एक्टिव था। वे अपने जनरलों की बातें सुन भी पा रहे थे। डॉक्टरों की एक गलती से जिंदा इंसान को मुर्दा मान लिया गया। इसके कई दिनों बाद सांस रुकने या हार्ट फेल होने से उनकी असली मौत हुई।

जहर और अन्य साइंटिफिक थ्योरीज़

गिलेन-बैरे सिंड्रोम के अलावा डॉक्टरों और विष-विशेषज्ञों ने कुछ और थ्योरीज़ भी दी हैं ।

व्हाइट हेलेबोर का जहर: साल 2014 में न्यूजीलैंड के रिसर्चर डॉ. लियो शेप ने एक थ्योरी दी। उनके मुताबिक अलेक्जेंडर को तुरंत मार देने वाला जहर नहीं दिया गया था। शायद उन्हें व्हाइट हेलेबोर नाम की जहरीली लता का रस, शराब में मिलाकर दिया गया था। यह जहर धीरे-धीरे नसों को सुन्न करता है। इसके लक्षण अलेक्जेंडर की बीमारी से काफी मिलते-जुलते हैं।

मलेरिया और टाइफाइड: बेबीलोन का इलाका उस समय दलदली जमीनों से घिरा था। वहां मलेरिया और टाइफाइड फैलना आम बात थी। अलेक्जेंडर बहुत ज्यादा शराब पी रहे थे और थके हुए भी थे। इस वजह से इन बीमारियों से उनके ऑर्गन खराब हो सकते थे। कई रिसर्चर ऐसा भी मानते हैं।

वेस्ट नाइल वायरस: साल 2003 में बायोलॉजिस्ट्स ने वेस्ट नाइल वायरस की थ्योरी दी। बीमार सम्राट बेबीलोन में घुसते ही आसमान से कौए गिरकर मर रहे थे। प्लूटार्क की किताब में इसका जिक्र है। यह इस वायरस का शुरुआती सिग्नल था। मेडिकल साइंस के मुताबिक 99% लोग इस वायरस से मामूली फ्लू के बाद ठीक हो जाते हैं। सिर्फ 1% मामलों में ही गंभीर पैरालिसिस होता है। शराब और थकान से अलेक्जेंडर की इम्युनिटी कमजोर थी। इसलिए वे इस 1% की श्रेणी में शायद आ गए। कई वैज्ञानिकों को यह बात सही लगती है।

आखिरी शब्द और एक विशाल साम्राज्य का अंत

जब अलेक्जेंडर अपनी आखिरी सांसें गिन रहे थे, तब उनके जनरलों ने सवाल किया–आपकी मौत के बाद इस विशाल साम्राज्य का मालिक कौन होगा?

ग्रीक इतिहासकार डियोडोरस सिक्युलस ने अपनी किताब Bibliotheca Historica में इसका जिक्र किया है। उनके मुताबिक अलेक्जेंडर ने अपनी बची-कुची ताकत लगाकर सिर्फ एक ग्रीक शब्द बोला था–Kratisto, इसका सिंपल मतलब था–जो सबसे ताकतवर हो या जो सबसे योग्य हो।

अलेक्जेंडर ने किसी को अपना वारिस नहीं बनाया था। इसलिए उनकी मौत के तुरंत बाद जनरलों में गद्दी हथियाने की खूनी जंग शुरू हो गई। इन जनरलों को इतिहास में डायडोची कहा जाता है। इस जंग के चलते उनका विशाल साम्राज्य बिखर गया। यहीं से इतिहास का एक नया दौर शुरू हुआ, जिसे हेलेनिस्टिक युग कहा जाता है।

मैसेडोनिया के ये महान सम्राट कभी किसी युद्ध में नहीं हारे। लेकिन बेबीलोन के एक बंद कमरे में बीमारी से उनका जीवन थम गया। सालों तक लोग इसे चमत्कार या साजिश मानते रहे। पर आज मेडिकल साइंस ने गिलेन-बैरे सिंड्रोम जैसी थ्योरी से इस घटना को समझने की नई दिशा दी है। भविष्य में अगर अलेक्जेंडर की कब्र सामने आती है या उनका कंकाल मिलता है, तो शायद बचे हुए सारे रहस्य भी पूरी तरह साफ हो जाएंगे।