4,000 Years of Hidden History: The Shocking Link Between Abraham and Lord Brahma

प्राचीन इतिहास के पन्नों को पलटें, तो कुछ खास नाम सामने आते हैं। जो नाम सदियों से लोगों को सोचने पर मजबूर करते रहे हैं। सेमेटिक परंपराओं (यहूदी, ईसाई और इस्लाम) मूल पुरुष 'अब्राहम' (हज़रत इब्राहिम) का बड़ा नाम है। वहीं हिंदू धर्म में 'ब्रह्मा' को सृष्टि का रचयिता माना जाता है। क्या ये दोनों नाम सिर्फ एक इत्तेफ़ाक हैं? या इसके पीछे कोई भुला दिया गया हिस्टोरिकल फैक्ट छिपा है? आम लोगों के मन में यह सवाल हमेशा तैरता रहता है। कुछ लोग इसे छिपा हुआ सच मानते हैं, तो वहीं एकेडमिक रिसर्चरस इसे बिना किसी लॉजिक की कल्पना मानते हैं। इस लेख में हम इस पूरे मामले को एकदम आसान भाषा में समझेंगे। इसके लिए हम इतिहास, पुरानी किताबों और समय के गणित की मदद लेंगे।

समानताओं का आधार और शुरुआती दावे

इन दो अलग-अलग किरदारों के बीच तुलना की मुख्य वजह कुछ खास बातें हैं। इनके नाम, प्रतीक और पुरानी कहानियां काफी हद तक मिलती-जुलती हैं ।

नामों में अजीब सी बनावट: 'अब्राहम' (Abraham) शब्द को ध्यान से देखें। इसे 'Ab-Raham' या 'A-Braham' के रूप में देखा जाता है। हिंदू ग्रंथों के 'ब्रह्मा' (Brahma) शब्द से इसका उच्चारण काफी हद तक मिलता-जुलता लगता है।

पत्नी का नाम: सेमेटिक मान्यताओं में अब्राहम की पत्नी का नाम 'सारा' (Sarah या Sarai) है। तो दूसरी ओर, हिंदू माईथोलॉजिकल ट्रेडीशन में ब्रह्मा की पत्नी या शक्ति  'सरस्वती' (Saraswati) हैं।

पीढ़ियों की कहानियां: अब्राहम के दो बेटे थे–इस इस्माएल और इसहाक। आगे चल कर इनके ज़रिए दो अलग-अलग समुदाय बने। ठीक इसी तरह, पौराणिक कहानियों में ब्रह्मा से मानव जाति के आदि पिता 'मनु' का जन्म हुआ और अलग अलग ओरिजिन की बात की गई ।

इन समानताओं को देखकर किसी के भी मन में क्यूरोसिटी पैदा होना स्वाभाविक है। लेकिन इस पूरे मामले को सही से समझने के लिए हमें थोड़ा गहराई में उतरना होगा।

समय का गणित: कॉस्मिक स्केल बनाम इंसानी इतिहास

किसी भी ऐतिहासिक जांच में टाइमलाइन का ढांचा (Chronology) बहुत ज़रूरी होता है। अब्राहम और ब्रह्मा की तुलना करते वक्त समय का यह गणित ही सबसे बड़ा फर्क सामने ला देता है।

ब्रह्मा का समय (कॉस्मिक स्केल): हिंदू पुराणों (जैसे विष्णु पुराण और मत्स्य पुराण) के अनुसार ब्रह्मा का समय बहुत विशाल है। उनका एक्जिस्टेंस किसी इंसान की उम्र या इतिहास से नहीं नापा जा सकता। इसे ब्रह्मांड की विशाल घड़ी (Cosmic Scale) के ज़रिए देखा जाता है ।

ब्रह्मा का 1 दिन 1 कल्प होता जो 432 करोड़ इंसानी साल (सूर्य सिद्धांत, अध्याय 1) होता है । बही ब्रह्मा की 1 रात और 432 करोड़ साल होता हैं। यानि ब्रह्मा का पूरा 1 दिन-रात 864 करोड़ साल की है । हिंदू माईथोलॉजी में बताया गया कि ब्रह्मा की कुल उम्र 100 ब्रह्मा-वर्ष लगभग 311 ट्रिलियन या लाख करोड़ इंसानी साल ।

पुराणों के अनुसार ब्रह्मा अभी अपनी उम्र के 51वें साल में हैं। यानी रिलीजियस व्यू से ब्रह्मा का टाइमलाइन अरबों साल पुराना है। दूसरी ओर, इतिहासकार एक अलग बात कहते हैं। वे बताते हैं कि 'ब्रह्मा से जुड़े ग्रंथ ईसा पूर्व 1500 से 500 के बीच लिखे गए' (स्रोत: A History of Indian Philosophy, Surendranath Dasgupta)। इसका मतलब ये ब्रह्मा की उम्र नहीं, बल्कि यह है कि इंसानों ने उनके बारो में किताबें में पहली बार कब लिखी थीं।

अब्राहम का समय (इंसानी और ऐतिहासिक हिसाब): अब्राहम का समय कोई अरबों साल की कहानी नहीं है। यह पूरी तरह से इंसानी इतिहास का हिस्सा है । उनका अनुमानित समय ईसा पूर्व 2000 से 1800। यह आज से लगभग 3,800 से 4,000 साल पहले की बात है, जिसे कांस्य युग (Bronze Age) कहा जाता है (स्रोत: The Ancient Near East, William H. Hallo)।

हिस्टोरिकल फैक्ट के हिसाब से अब्राहम एक ऐतिहासिक इंसान थे। वे कबीले के हेड और धार्मिक मान्यता के अनुसार एक पैगंबर थे। वे मेसोपोटामिया के 'उर'(UR) शहर से निकलकर कनान और मिस्र तक गए थे। उनके इस सफर के साफ़ ज्योग्राफिकल और पॉलिटिकल सबूत मिलते हैं (Book of Genesis, Hebrew Bible)।

सीधे शब्दों में कहा जाए तो अब्राहम 4,000 साल पहले के एक रक्त-मांस के इंसान थे। वहीं ब्रह्मा पौराणिक नज़रिए से अरबों सालों में फैले एक देवता हैं।

इतिहास की प्रमुख रिसर्च, बुक्स और सोर्सेज (1764 - 2002)

अब्राहम और ब्रह्मा को एक ही साबित करने की कोशिश कोई नई बात नहीं बल्कि बहुत पुरानी है। इस विषय पर कई प्रमुख किताबें सामने आई हैं । नीचे इस टॉपिक पर पब्लिश प्रमुख रिसर्च और बुक्स की लिस्ट दी गई है ।

1.पहली सदी (फ्लेवियस जोसेफस): यहूदी इतिहासकार जोसेफस ने अपनी किताब अगेन्स्ट एपियन (Flavius Josephus, Against Apion, Book I, Chapter 22) में लिखा कि भारतीय दार्शनिकों और सेमेटिक समुदायों के बीच बहुत पुराने रिश्ते थे।

2.1764 (वॉल्टेयर की रिसर्च): फ्रांसीसी विचारक वॉल्टेयर ने 1764 में अपनी किताब डिक्शनरी फिलोसोफिक (Voltaire, Dictionnaire philosophique, 1764) में पहली बार लिखा कि 'अब्राहम' नाम भारत के 'ब्रह्मा' शब्द से निकला हो सकता है।

3.1788 (एशियाटिक सोसाइटी की चर्चा): सर विलियम जोन्स ने 1788 में कोलकाता की एशियाटिक सोसाइटी में संस्कृत और सेमेटिक भाषाओं की सिमीलारिटीज पर चर्चा शुरू की थी (Asiatick Researches, Vol. 1, 1788)।

4.1836 (गॉडफ्रे हिगिंस की किताब): इस विषय पर सबसे बड़ी किताब गॉडफ्रे हिगिंस ने लिखी, जिसका नाम अनाकालैप्सिस (Godfrey Higgins, Anacalypsis, 1836) है। उन्होंने दावा किया कि अब्राहम और ब्रह्मा एक ही इंसान हैं, और उनके पत्नियां सारा तथा सरस्वती एक ही रूपक के दो नाम हैं।

5.1995 और 2002 (जीन मैटलोक के दावे): अमेरिकी लेखक जीन मैटलोक ने अपनी किताबों इंडिया: द क्रैडल ऑफ वर्ल्ड सिविलाइजेशन (Gene D. Matlock, India: The Cradle of World Civilization, 1995) और अब्राहम, इज़रायल'स फर्स्ट गुरु (Gene D. Matlock, Abraham, Israel's First Guru, 2002) में दावा किया कि अब्राहम असल में भारत के एक वैदिक राजकुमार या ब्राह्मण थे, जो बाद में मेसोपोटामिया चले गए थे।

भाषा विज्ञान और इतिहासकारों की राय

ऊपर बताई गई किताबें, आम पाठकों के बीच बहुत मशहूर हुईं। लेकिन भाषा विशेषज्ञों और इतिहासकारों ने इन तर्कों को साफ तौर पर रिजेक्ट कर दिया। इसके मुख्य कारण नीचे दिए गए हैं ।

1.गलत शब्द-समानता (False Etymology): भाषा विज्ञान के नियमों के अनुसार 'अब्राहम' शब्द सेमेटिक भाषा से आता है। हिब्रू भाषा में 'आव'(Av) का अर्थ 'पिता' और 'राहाम'(Raham) का अर्थ 'बहुत से लोग' होता है (स्रोत: Hebrew and Aramaic Lexicon of the Old Testament, Ludwig Koehler & Walter Baumgartner)। यानी अब्राहम का मतलब 'कई जातियों का पिता' है। दूसरी ओर 'ब्रह्मा' शब्द संस्कृत की 'बृह' धातु से बना है, जिसका अर्थ 'फैलना' या 'परम सत्ता' होता है (स्रोत: A Sanskrit-English Dictionary, Sir Monier Monier-Williams)।

2.सारा बनाम सरस्वती: हिब्रू भाषा में 'सारा' शब्द का मतलब होता है 'राजकुमारी' । लेकिन संस्कृत के 'सरस्वती' शब्द का मतलब 'बहता हुआ पानी' या 'ज्ञान की नदी' है। इसलिए दोनों के मूल अर्थ और व्याकरण बिल्कुल अलग अलग हैं।

इसके अलावा, मेसोपोटामिया और सिंधु घाटी सभ्यता के बीच व्यापार के सबूत तो मिलते हैं (स्रोत: Ancient Mesopotamia and the Indus Civilization, Gregory L. Possehl), लेकिन कोई इंसान एक देश से दूसरे देश जाकर बदल गया, इसका कोई आर्कियोलॉजिकल एविडेंस नहीं मिला है।

आज की ज़मीनी हकीकत और फाइनल कन्क्लूजन

आज दुनिया भर की बड़ी यूनिवर्सिटीज़ और इतिहासकारों की राय बहुत साफ़ है। ऑक्सफोर्ड, कैंब्रिज या दिल्ली यूनिवर्सिटी का कोई भी जानकार अब्राहम और ब्रह्मा को एक ही इंसान नहीं मानता (स्रोत: Oxford History of Historical Writing)। इंटरनेट पर इसे एक इंटरेस्टिंग कहानी की तरह फैलाया ज़रूर जाता है, लेकिन मनोविज्ञान की भाषा में इसे अपोफेनिया (Apophenia) कहा जाता है (स्रोत: Psychology of Pattern Recognition, Klaus Conrad)। इसका मतलब है दो अलग चीज़ों के बीच जबरदस्ती कोई पैटर्न या समानता ढूंढना।

नतीजा यह है कि अब्राहम 4,000 साल पहले के एक महान ऐतिहासिक इंसान थे। वहीं ब्रह्मा भारतीय सोच में अरबों-खरबो सालों में फैले सृष्टि के प्रतीक हैं। दोनों किरदार अपनी जगह महान हैं, लेकिन बिना पक्के सबूतों के बिना इन्हें एक ही इंसान कहना सही नहीं है।